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 बेहद लचीला है भारतीय संविधान, 70 साल में हुए 103 संशोधन (Sat, Jan 26th 2019 / 10:48:22)

 


अश्वनी तिवारी
देश आज अपना 70वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इसी दिन 1950 में भारत सरकार अधिनियम एक्ट (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। 15 अगस्त, 1947 को देश के आजाद होने के बाद 29 अगस्त को संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमिटि का गठन किया गया। भारतीय संविधान को बनने में 2 साल, 11 माह, 17 दिन लगे और यह 26 जनवरी 1950 को ये लागू हुआ।
एक समय पर सोने की चिड़िया कहलाए जाने वाले हमारे देश की बहुत सी बातें ऐसी हैं जिनसे हमें गर्व महसूस होता है। उन्हीं में से एक है हमारा संविधान, जो लचीला, सुरक्षित और कलात्मक है। संविधान के लागू होने के बाद से इसमें 103 संशोधन किए जा चुके हैं। जिनमें से 12 सबसे महत्वपूर्ण हैं। संविधान विशेषज्ञ व लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ. सुभाष कश्यप का कहना है कि भारत का संविधान इतना लचीला है कि जरूरत पड़ने पर मूलभूत ढांचे को छोड़कर कुछ भी बदलाव संभव हैै।
इसका मतलब ये है कि संविधान की सर्वोच्चता, इसका धर्मनिरपेक्ष व संघीय चरित्र, राज्य व केंद्र में शक्ति विभाजन, भारत की संप्रभुता तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता को छोड़ कर अन्य परिवर्तन किए जा सकते हैं। संशोधन संविधान के ही अनुच्छेद 368 के अंतर्गत हो सकता है। अभी तक 103 संशोधन हो चुके हैं। इसके लिए 124 संविधान संशाेधन विधेयक पारित हुए हैं। हमारा संविधान विश्व के सबसे अधिक संशोधित संविधानों में से एक माना जाता है।
तो चलिए जानते हैं वो 12 महत्वपूर्ण संशोधन
7वां संशोधन, 1956
साल 1956 में 7वां संशोधन किया गया। जिसके तहत भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन किया गया। यह संशोधन राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किया गया।
44वां संशोधन, 1978
साल 1978 में 44वां संशोधन किया गया। जिसके तहत संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकार से बाहर किया गया। यह बेहद महत्वपूर्ण संशोधन था। इस संशोधन से पहले जमींदारी उन्मूलन और संपत्ति के अधिकार को लेकर न्यायपालिका और विधायिका के बीच लंबे समय तक विवाद की स्थिति बनी रही। चाहे फिर केशवानंद भारती मामला हो या फिर गोलकनाथ मामला।
संसद ने जमींदारी उन्मूलन के लिए जो कानून बनाया था, उसे न्यायपालिका ने निरस्त कर दिया। इसके बाद संविधान में संशोधन किया गया, जिसे न्यायापालिका ने नहीं स्वीकारा। इसके बाद कई संशोधन किए गए, जिनमें पहला, चौथा, 17वां, 29वां, 34वां आदि संशोधन हैं। आखिर में साल 1978 में 44वां संशोधन किया गया। जिसके तहत संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकारों के अध्याय से निकाल दिया गया।
52वां संशोधन, 1985
साल 1985 में 52वां संशोधन किया गया। दल बदल के खिलाफ ये संशोधन किया गया। इसमें संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी गई। जिसे दल-बदल विरोधी कानून कहा जाता है। इसमें दल बदलने वाले लोगों की सदस्यता समाप्त करने का प्रावधान किया गया है।
73वां और 74वां संशोधन, 1992
साल 1992 में 73वां और 74वां संशोधन से पंचायती राज व्यवस्था आई। इसके तहत नगर पालिकाओं और पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया गया। साथ ही कानून में ये प्रावधान भी किया गया कि इन्हें 6 महीने से अधिक समय के लिए निलंबित नहीं रखा जा सकता।
86वां संशोधन, 2002
साल 2002 में 86वां संशोधन किया गया। जिसके तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिया गया।
91वां संशोधन, 2004
2004 में 91वां संशोधन किया गया। इसके तहत मंत्रियों की संख्या पर केंद्र और राज्य में अंकुश लगाया गया। ये तय किया गया कि मंत्रियों की संख्या निम्न सदन के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। इससे पहले मंत्रियों की संख्या काफी अधिक होती थी। और जो सदस्य मंत्री नहीं भी होते थे, उन्हें भी मंत्री जैसा ही दर्जा दिया जाता था। 
93वां संशोधन, 2006
साल 2006 में 93वां संशोधन किया गया। इसके तहत संविधान के अनुच्छेद 15 में बदलाव किया गया। सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़ों को शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की व्यवस्था की गई। इससे पहले ये प्रावधान केवल एससी-एसटी और एंग्लो इंडियंस के लिए था। इस संशाेधन में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को यह सुविधा दी गई।
99वां संशोधन, 2014
साल 2014 में 99वां संशोधन किया गया। इसमें जिसके द्वारा नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन का प्रावधान किया गया। भारत में जजों को जजों के कॉलेजियम द्वारा ही चुना जाता है, इसी में सुधार के लिए 99 वां संशोधन लाया गया था। दुनिया के किसी अन्य देश में ऐसा नहीं होता है। लेकिन जब ये मामला कोर्ट पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया।
61वां संशोधन, 1989
साल 1989 में 61वां संशोधन किया गया। इस संशोधन से मताधिकार की आयु 21 वर्ष से कम करके 18 वर्ष की गई।
101वां संशोधन, 2017
साल 2017 में 101वां संशोधन किया गया। जिसके तहत गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (जीएसटी) को लागू किया गया।
103वां संशोधन, 2019
साल 2019 में 103वां संशोधन किया गया। इसके तहत आर्थिक रूप से पिछड़ों को आरक्षण दिया गया।

 
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